Thursday, 21 October 2021

Start Menu in windows

 Start menu, task Bar के दाई ओर प्रदर्शित होता हैं इस पर क्लिक करने से निम्न Menu प्रदर्शित होता हैं यह Windows 95, 98, 2000, XP, 7 व अन्य में अलग अलग होता हैं| जैसे Windows XP Professional में Start Menu इस प्रकार हैं |


Program/Program Manager option

यह प्रोग्राम ग्रुप अनुप्रयोगों को शुरू करने के लिए सबसे पहली प्रक्रिया को प्रारंभ करता हैं इससे हम किसी भी सॉफ्टवेयर को प्राप्त कर सकते हैं जैसे – MS Office, Page maker, Photoshop, Games आदि|


My Documents

यदि My Document option पर क्लिक करते हैं तो यह यूजर के अंतिम 15 दस्तावेजों को खोलता हैं | यूजर चाहे गए document को open कर सकता हैं यह किसी अंतिम डॉक्यूमेंट को खोलने का आसान तरीका हैं|


Setting option

कंप्यूटर की हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर की बहुत सी व्यवस्थाओं को सेटिंग विंडो द्वारा नियंत्रित किया जा सकता हैं, इसमें Control panel, Printer, Tool Bar एवं Start menu आदि आप्शन होते हैं|


Find and Search option

डिस्क अथवा इन्टरनेट में फाइल व फ़ोल्डर्स को खोजने के लिए Find अथवा सर्च ऑप्शन का प्रयोग किया जाता हैं इसमें फाइलें, फ़ोल्डर्स को Date, type अथवा Size के आधार पर खोजा जा सकता हैं|


Help option

विंडोज हमें अनेक प्रश्नों के उत्तर के लिए हेल्प ऑप्शन प्रदान करती हैं इससे हम FAQ (Frequently asked Question) का लाभ उठा सकते हैं|


Run option

इसके द्वारा किसी प्रोग्राम के क्रियान्वयन अथवा फोल्डर को खोलने के लिए निर्देश टाइप किये जा सकते हैं | जैसे – winword टाइप करने पर MS Word, excel टाइप करने पर MS Excel, CMD टाइप करने पर Command prompt विंडो खुल जाती हैं|




Features of Windows XP

 Windows XP की अपनी कुछ विशेषताऐं है। जिसकी वजह से यह बहुत popularहै।


1. GUI Interface :- windows XP Graphical User Interface operating system है। इसमें Picture, icon, symbol आदि की सहायता से इसको आसानी से चलाया जा सकता है।


2. Plug & Play :- इसमें Plug & Play क्षमता हैं जो इसे और अधिक सरल बनाता है इससे आप कोई भी नई डिवाइस कम्प्यूटर में आसानी से जोडकर चला सकते है। इसमे ड्राईवर सीडी की आवश्यकता नही होती है।


3.Help & Support :- windows XP की सबसे अच्छी विशेषता help & Support option है इससे हम Windows xp की हेल्प ले सकते हैं। और अपने कार्य को सफलता पूर्वक कर सकते है। इसकी shortcut key F1 है


4. File and setting transfer wizard :– इससे हम एक कम्प्यूटर की विडोण्ज setting दूसरे Computer में transfer कर सकते है। जिसकी प्रक्रिया निम्न प्रकार हैं –


Start- all program- accessories – system tool- File and setting transfer wizard


5. Clear Type :- इससे text clarity को बढ़ाया जा सकता है। जिसकी प्रक्रिया निम्न प्रकार हैं –


Right click on desktop- appearance- effect – select clear type


6. Tour windows xp :- windows xp के साथ सबसे बडी विशेषता Tour windows xp है जिससे हम basic windows xp चलाना सीख सकते है।


7. Remote Desktop Connection :- इससे हम अपने दूर बैठे व्यक्ति से रिमोटली जुडकर हेल्प ले सकते है। अर्थात् दूर बैठा व्यक्ति हमारे कम्प्यूटर को ऑपरेट कर सकता है।


Start- all program- accessories- Communication- Remote desktop


8.Write to CD :- windows xp में CD Write करने वाले software की आवश्यकता नही होती सीधे CDको राईट कर सकते हैं।


9.Clean Desktop :- windows XP में क्लिीन डेक्सटाॅप सुविधा होती है। इससे ऐसे आईकाॅन जिनका प्रयोग साठ दिन तक नहीं करते है। उन आईकान को क्लीन डेक्सटाॅप फोल्डर में Transfer कर दिया जाता है। जिससे डेक्सटाॅप clean दिखने लगता है।


Right click on desktop- Desktop- custom desktop – cleanup desktop


10. Easy to connect Network:- windows xp में network में network को जोडना आसान होता है। क्योंकि इसमें wizard method का प्रयोग किया जाता है।


11. Search:– windows xp में searchingकरना आसान होता है। इसमें अलग अलग प्रकार से भी Searching कर सकते हैं। जैसे यूजर की  फाईल फोल्डर contact आदि।


Start- Search or windows+ F


12. Easy to installation:-इसमें किसी भी प्रोग्राम को स्थिापित करना आसान होता है। क्योंकि इसमें विजार्ड से installationहोता है।


13. Accessibility: – इसमें Accessibility होती हैं। जिससे इसको अंधे एवं बहरे लोग भी चला सकते है इसमें ऑनस्क्रीन कीबोर्ड भी होता है। जिससे इसको मााउस से चला सकते है।


Start- all program- accessories- accessibility

Windows structure

 किसी विंडो की संरचना (Anatomy of a Window):- Windows के नए यूजर्स के लिए किसी विंडो की रचना और उसके तत्वों को भली प्रकार से समझ लेना आवश्यक है कोई विंडो किसी कंप्यूटर की V.D.U अथवा स्क्रीन का एक आयताकार भाग है जिसमे कोई प्रोग्राम अपनी सूचनाये प्रदर्शित करता है ज्यादातर विंडोज में बहुत से तत्व समान होते है यहाँ हम विंडो के विभिन्न भागो का वर्णन करेगे और उनका महत्व और उपयोग बतायेगे


टाइटल बार (TITLE BAR): – प्रत्येक विंडो का एक विशेष नाम होता है  Window के सबसे ऊपरी भाग की पट्टी को टाइटल बार कहते है कभी कभी किसी प्रोग्राम की Window की टाइटल बार में उन दस्तावेजो का नाम भी दिया होता है जिस पर कार्य किया जा रहा है आपके कंप्यूटर की स्क्रीनएक साथ कई Window खुली हो सकती है लेकिन एक समय में उनमे से केवल एक Window सक्रिय रहती है | Window के टाइटल बार का रंग तथा तीव्रता दूसरी Window के टाइटल बार के रंग तथा तीव्रता से अधिक होता है


कंट्रोल बटन (CONTROL BUTTON) :- अधिकतर Windows के टाईटल बार में दायें छोर पर तीन कण्ट्रोल बटन होते है जिनके नाम minimize,maximize/restore/close|ये बटन प्रायः इसी क्रम में पाए जाते है |मिनीमाइज बटन पर एक छोटी रेखा या डेश(-) छपा होता है इस बटन को क्लिक करने से Window अस्थाई रूप से बंद होकर टास्क बार में एक बटन के रूप में बदल जाती है आप इस बटन को क्लिक करके Window को अपने पूर्व आकार में ला सकते है| कोई प्रोग्राम टास्क बार में बटन के रूप में आ जाने पर भी चलता रहता है , लेकिन उसकी कोई Window खुली नहीं होती है maximize button पर एक छोटा वर्ग छपा होता है |इस बटन को क्लिक करने पर यह पूरी स्क्रीन के बराबर हो जाती है और maximize button रिस्टोर बटन के रूप में बदल जाता है |



मेन्यु बार (MENU BAR):- मेन्यु बार विकल्पों की एक सूची होती है जिनमे से आवश्यकता के अनुसार कोई एक विकल्प चुना जाता है | प्रत्येक विकल्प सामान्यतः किसी क्रिया या सेटिंग को व्यक्त करता है | सामान्यतः मेन्यु एक आयामी होता है जिसमे सभी विकल्प एक ही सीध में ऊपर से नीचे दिए होते है   विकल्पों की संख्या अधिक होने पर उनको समूहों में बाँट दिया जाता है और प्रत्येक समूह का एक नाम रखा जाता है |


टूल बार (TOOL BAR) :- अधिकांश Windows आधारित प्रोग्रामो में टूल बार की सुविधा होती है | किसी Window में एक से अधिक टूल बार भी हो सकते है | टूल बार कुछ बटनों का एक संग्रह होता है जिनमे प्रत्येक के द्धारा कोई विशेष कार्य किया जाता है | इन बटनों को टूल भी कहा जाता है | किसी बटन या टूल को क्लिक करने पर उससे सम्बंधित आदेश या क्रिया प्रारंभ हो जाती है |


स्क्रोल बार (SCROLL BAR):- सामान्यतया प्रत्येक विंडो में दो स्क्रोल बार होते है |ये उस Window में दिखाई जा रही सामग्री को पूरा देखने में सहायक होते है |Window का आकार सीमित होने के कारण उसमे सभी सामग्री एक साथ पूरी दिखाई नहीं केवल उस सामग्री का एक भाग ही दिखाई देता है | स्क्रॉल बार की सहायता से हम छिपी हुई सामग्री को भी उस Window में देख सकते है | स्क्रॉल बार दो हो सकते है – Horizontal scroll bar ,vertical scroll bar


स्टेटस बार (STATUS BAR):- यह बार प्रायः Window के सबसे नीचे की पट्टी की रूप में होता है | इस बार में उस Window अथवा उसमे खुले हुए किसी दस्तावेजो के बारे में नवीनतम सूचना या स्थिति प्रदर्शित की जाती है |

विंडोज का विकास

 Evolution of Windows (विंडोज का विकास)

Windows ऑपरेटिंग सिस्टम ग्राफिकल यूज़र इंटरफ़ेस (Graphical user interface) पर किए गए Research का परिणाम है सन 1980 के बाद के दशक के प्रारंभ में मैसर्स जीरॉक्स कॉरपोरेशन द्वारा इस विषय पर Research किया गया था Research work से यह सिद्ध हुआ कि हाथ में पकड़े जाने वाली किसी भी डिवाइस जैसे माउस के द्वारा इमेज के माध्यम से कंप्यूटर के साथ संवाद (communication) करना कहीं अधिक सरल है इस कंपनी में इस सुविधा के साथ सबसे पहले जीरॉक्स नामक कंप्यूटर का विकास किया |


लेकिन ग्राफिकल यूज़र इंटरफ़ेस को वास्तविक लोकप्रियता मेसर्स एप्पल कंप्यूटर द्वारा बाजार में उतारे गए मैकिनटोश कंप्यूटर द्वारा प्राप्त हुई इसमें एक संपूर्ण ऑपरेटिंग सिस्टम था जो ग्राफिकल यूजर इंटरफेस पर आधारित था यद्यपि यह गति के मामले में बहुत धीमा था लेकिन व्यवसायिक दृष्टि से यह बहुत सरल रहा|


सन 1980 में Windows सबसे अधिक लोकप्रिय ऑपरेटिंग सिस्टम बन गया था यह IBM कंपनी द्वारा आधिकारिक रूप से स्वीकृत एवं उपयोग किया गया आजकल लगभग सभी आईबीएम एवं उसके समतुल्य पर्सनल कंप्यूटरों पर Windows XP, Windows Vista, Windows me, Windows 7, windows 8, Windows 8.1, Windows 10,Windows 11  उपलब्ध है|

Windows 1.0

Release date: November 1985

Windows 3.0

Release date: May 22, 1990

Windows 95

Release date: August 24, 1995

Windows 98

Release date: June 25, 1998

Windows XP

Release date: October 25, 2001

Windows Vista

Release date: January 30, 2007

Windows 7

Release date: October 22, 2009

Windows 8

Release date: October 26, 2012

Windows 10

Release date: July 29, 2015

Windows 11

Release date: October 05, 2021

Windows क्या है ?

 विंडोज की अवधारणा (Window Concept)


Window शब्द माइक्रोसॉफ्ट के GUI ऑपरेटिंग सिस्टम Ms Windows के विभिन्न संस्करणों के लिए उपयोग किया जाता है जिसमे हमे एक ऐसा वातावरण मिलता है जिसमे सभी सुविधाए चित्रात्मक रूप में आइकॉन, मेन्यु, बटनों आदि के रूप में मिलती है |इस ऑपरेटिंग सिस्टम का नाम विंडोज इसलिए रखा गया क्योकि इसमें प्रत्येक सॉफ्टवेयर एक आयताकार ग्राफ़िक्स बॉक्स के रूप में खुलता है, जो खिड़की की चौखट के सामान होता है और जिसके माध्यम से हम आज कंप्यूटर को  केवल की-बोर्ड से टाइप होने वाले अक्षरों से निकलकर एक नए वातावरण के रूप में देख पाए | यह चित्रात्मक वातावरण कंप्यूटर की दुनिया को रोचक और सरल बनाने क्र द्रष्टि से बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है |


Windows सबसे पहले डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम के अंतर्गत एक सॉफ्टवेयर के रूप में आया जिसका windows 3.1 संस्करण बहुत लोकप्रिय हुआ | इसके बाद सन 1995 में यह windows 95 के नाम से एक संपूर्ण ऑपरेटिंग सिस्टम के रूप में जारी हुआ जिसके अब तक Windows 95, Windows 98, Windows 2000, Windows Me, Windows XP, Windows NT, Windows Vista,Windows 7, Windows 8, Windows 8.1, Windows 10 आदि अनेक संस्करण जारी हुए|




What is kernel in Linux

 Kernel Linux Operating System की कोर प्रोग्राम होती है। Kernelएक ऐसा आॅपरेटिंग सिस्टम प्रोग्राम हेै जो कि कम्प्यूटर हार्डवेयर के संसाधनों को नियंत्रित करके उनका उचित उपयोग यूजर से करवाता है। जैसे ही कम्प्यूटर Start होता है कर्नल लांच हो जाता है। और कम्प्यूटर के आॅफ होने तक लोड रहता है। यह इस बात पर निर्भर नही करता कि आप कौन से साफ्टवेयर या शैल को रन कर रहे है।


It’s memory resident portion of Linux, It performance following task : –

I/O management

Prcesse management

device management

file management

Memory management

Error handling

Command execution

Linux commands

 .bc Command

.bc Command का उपयोग टर्मिनल पर कैलकुलेटर की सुविधा को प्राप्त करने में किया जाता है | इसके लिए प्रोम्प्ट पर .bc Command type कर enter key press कीजिये | जिससे कैलकुलेटर की सुविधा सक्रिय हो जाएगी | अब हम कोई भी गणना कर सकते है इसे बंद कर वापस प्रोम्प्ट पर जाने के लिए Ctrl+D दबाये |


$bc

22+32

54


Cal command

इस कमांड का उपयोग वर्तमान माह का कैलेण्डर की सुविधा प्राप्त करने के लिए किया जाता है|

&Cal


Cal command के साथ निम्न विकल्प भी दिए जाते है |

Cal-3:-यह विकल्प वर्तमान माह तथा पिछले माह तथा अगले माह का कैलेण्डर एक साथ प्रदर्शित करता है |

Cal-4:-यह विकल्प पूरे वर्ष का कैलेण्डर प्रदर्शित करता है


Cat command

इस कमांड का उपयोग प्रोम्प्ट कर नयी फाइल बनाने के लिए किया जाता है यह कमांड डॉस के copycon कमांड के समान ही होती है


कमांड सरचना :-

$Cat><file name>

……     ………….

……      ………….

˄D

उपर्युक्त संरचना से स्पष्ट है की cat कमांड के साथ ‘>’चिन्ह का उपयोग कर फाइल का नाम देगे दिए गये नाम से एक नयी फाइल बन जाएगी|फाइल में मेटर टाइप करते समय प्रत्येक लाइन समाप्त होने पर इंटर दबायेगे तथा फाइल को बंद करने के लिए Ctrl+D का उपयोग करेगे |


Cp command

इस कमांड का उपयोग फाइल को कॉपी करने के लिए किया जाता है |


कमांड सरचना :-

$Cp><Source Filename><Target Filename>

Ex- $Cp Maruti Maruti1


Cd command

Cd शब्द का अर्थ है “change directory” अर्थात हम उस कमांड का उपयोग किसी डायरेक्ट्री तथा उसकी सब डायरेक्टरी में जाने के लिए करते है यह डॉस के cd कमांड के समान है जहा cd के साथ किसी डायरेक्टरी का नाम देने पर दी गई डायरेक्ट्री सक्रिय हो जाती है


कमांड सरचना :-

$Cd><Diroctoryname>

Ex- $Cd Practical


Chgrp command

यह कमांड समूह स्वामित्व को बदलने के लिए किया जाता है


कमांड सरचना :-

$Chrgp[Option]……..<Groupname><Filename>

Command के साथ निम्न option प्रयोग किये जाते है


V: प्रत्येक फाइल जिस पर प्रक्रिया की जा चुकी है | उसका निदानसूचक (output) प्रदर्शित होता है

Help: कमांड से सम्बंधित हेल्प प्रदर्शित करता है |

Version: संस्करण को प्रदर्शित करता है |

Chmod command

यह कमांड फाइल के एक्सेस अधिकार (Access Permission) बदलने के लिए उपयोग किया जाता है | अगर हम Is-1 Command के द्धारा Files की विस्तृत सूची देखे या Is-1 के साथ किसी फाइल का नाम देकर उस फाइल का विस्तृत विवरण देखे तो निम्नानुसार दिखाई देता है |

Ex: – $1s-1 Maruti

Rwx rwx rwx 1 root root 35 June 15 18:52 Maruti 


उपर्युक्त आउटपुट फाइल के विषय में निम्न विवरण दे रहा है


एक्सेस अधिकार (Access) स्वामी (Owner) का नाम ,फाइल का आकार(Size), दिनांक एवं समय (Date and Time),एवं का फाइल का नाम जैसा की स्पष्ट है की उपर्युक्त विवरण में पहली जानकारी एक्सेस अधिकारों को प्रदर्शित कर रही है | यहाँ लिए गए उदाहरण में हमें विवरण के एक्सेस अधिकार वाले खंड rwx rwx rwx लिखा दिखाई दे रहा उपर्युक्त जहा r,w, and x का अर्थ है

Linux file system

 हार्ड डिस्क में हजारो फाईले संग्रहित रहती है इन फाईलो के  अलग- अलग समूहों को अलग अलग डायरेक्टरीयो में रखकर बनने वाली संरचना फाइल सिस्टम कहलाती है, किसी भी हार्ड डिस्क पार्टीशन में संगृहित फाईलो की hierarchy  तथा डायरेक्टरी की संरचना फाइल सिस्टम कहलाती है|


माइक्रोसॉफ्ट डॉस या विंडोज के समान ही लाइनेक्स में हार्ड डिस्क ड्राइव की प्रथम या मूल डायरेक्ट्री रूट डायरेक्ट्री कहलाती है, तथा जिस प्रकार विंडोज वातावरण में रूट डायरेक्ट्री के अंतर्गत my document, recycle bin ,programs file आदि प्रमुख सबडायरेक्टरीया मिलती है ,जिनमे से प्रत्येक डायरेक्ट्री की अपनी विशिष्ट भूमिका होती है उसी प्रकार लाइनेक्स में भी हमे रूट डायरेक्ट्री के अंतर्गत- bin, boot, dev, home, lib, user आदि सब डायरेक्टरी  बनी बनाई मिलती है जिनमे विभिन्न श्रेणियों से सम्बंधित अलग-अलग फाइल संगृहित होती है |प्रमुख डायरेक्टरी निम्न प्रकार से है –


Root Directory


|–bin  डायरेक्ट्री (लाइनक्स के आवश्यक यूटिलिटी प्रोग्रामो का संग्रह)

|–boot  डायरेक्ट्री  (लाइनक्स के बूटिंग सम्बंधित सूचनाओ का संग्रह)

|–dev  डायरेक्ट्री (उपकरणों जैसव हार्डडिस्क, प्रिंटर आदि से सम्बंधित फाईले )

|–etc  डायरेक्ट्री (विभिन्न कोंफिगारेशन फाईलो का संग्रह)

|–home डायरेक्ट्री (विभिन्न यूजर्स डायरेक्टरीयो का संग्रह)

|–User 1

|–Ravi

|–Ram

|–User 4

|–Lib डायरेक्ट्री (सॉफ्टवेयर  लायब्रेरीकर्नेल मोड्यूल आदि का संग्रह)

|–mnt डायरेक्ट्री (इसके अंतर्गत हम अन्य संग्रहण उपकरणों के फाइल सिस्टम माउन्ट कर सकते है  )


जैसे-:


|–cdrom    डायरेक्ट्री (CD Rom)

|–floppy   डायरेक्ट्री (Floppy drive)

|–zap        डायरेक्ट्री (Zap drive)

|–root       डायरेक्ट्री (यह एक रूट नाम से संगृहीत डायरेक्ट्री होती है जहा सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर कार्य करता है |

|–tmp     डायरेक्ट्री (इन्टरनेट सम्बंधित अस्थायी फाईले यहाँ संगृहीत होती है जिन्हें हम बाद में डिलीट कर सकते है)

|–user       डायरेक्ट्री (अतिरिक्त यूटिलिटी प्रोग्राम तथा यूजर द्धारा बनाये गए प्रोग्रामो का संग्रह)

|–games

|–local      डायरेक्ट्री (यूजर निर्मित प्रोग्राम)

|–src         डायरेक्ट्री (यूजर द्धारा बनाये गए लोकल प्रोग्रामो का सोर्स कोड)

|–ver         डायरेक्ट्री (सिस्टम लोग फाईलो का संग्रह)


.Bin डायरेक्टरी

बिन डायरेक्ट्री लाइनक्स में उपस्थित यूटिलिटी तथा कमांड्स को संगृहीत करके रखती है | इस डायरेक्ट्री में रखे गए सभी प्रोग्राम तथा कमांड बाइनरी  फोर्मेट में होते है, इसलिए इस डायरेक्ट्री को बिन डायरेक्ट्री कहते है | इस डायरेक्ट्री के अंतर्गत आने वाली सभी कमांड्स को  हम डॉस के सामान ही लाइनक्स के कमांड प्रांप्ट (#प्रोम्प्ट/$प्रोम्प्ट) पर चला सकते है|


.dev डायरेक्टरी 

/dev डायरेक्ट्री में अधिकांश कंप्यूटर उपकरणों जैसे- प्रिंटर, माईक, श्रवण यंत्रो (Audio Devices) संग्रहण तंत्रों (Storage Device), जैसे- हार्डडिस्क, फ्लॉपी डिस्क, सी.डी.रोम आदि से सम्बंधित फाईले उपलब्ध होती है


.etc डायरेक्टरी 

जैसा की नाम से स्पष्ट है इस डायरेक्टरी में विविध प्रकार की मिश्रित एवं अतिरिक्त फाईले (miscellaneous) एवं डायरेक्टरीया रहती है |


./lib डायरेक्टरी 

इस डायरेक्टरी में सिस्टम लाइब्रेरी होती है जिसमे कम्पाइलर के लिए आवश्यक डाटा होता है विभिन्न कमांड तथा प्रोग्राम फायलो के क्रियान्वन के लिए कम्पाइलर को इस डाटा की आवश्यकता होती है |


.home डायरेक्टरी

इस डायरेक्ट्री में अधिकांशतः यूजर के द्धारा बनायीं गई डायरेक्टरीया होती है |


./user डायरेक्टरी

इस डायरेक्ट्री में  हार्ड डिस्क के अतिरिक्त अन्य संग्रहण उपकरणों जैसे-गेम्स आदि तथा स्वयं यूजर द्धारा बनाये गए प्रोग्राम संलग्न होते है |जैसे /user/bin डायरेक्टरी में यूजर के लिए उपयोगी अतिरिक्त यूटिलिटी प्रोग्राम है |


./mnt डायरेक्टरी 

इस डायरेक्ट्री का उपयोग हार्ड डिस्क के अतिरिक्त अन्य संग्रहण उपकरणों जैसे- सी.डी रोम आदि को डायरेक्ट्री का हिस्सा बनाने के लिया जाता है | तथा इसमें इन संग्रहण उपकरणों के फाइल सिस्टम अलग से संलग्न रहते है |


.tmp डायरेक्टरी

 इस डायरेक्ट्री में अस्थायी वर्क फाईले संगृहीत होती है ,जब हम यूटिलिटी प्रोग्रामो को चलाते है, तो क्रियान्वित  होते समय ये प्रोग्राम इन अस्थायी फाईलो को बनाते है| इस डायरेक्ट्री की फाईलो को लाइनक्स स्वयं समय समय पर अपने आप डिलीट करता रहता है|


Types of file in Linux

लाइनक्स में प्रोग्राम डाटा फाइल तथा कुछ विशेष फाइल  भी होती है लाइनक्स की इन सभी तरह की फाइल्स को मुख्य रूप से दो  श्रेणियों में बाँट सकते है |


Ordinary Files:-(साधारण फाइल )

इसमें यूजर द्धारा बनायीं गई फाइल्स  सम्मिलित होती है जैसे –डाटा फाइल , प्रोग्राम फाइल , ऑब्जेक्ट फाइल ,करणीय फाइल (executable file) डायरेक्टरी फाइल आदि| लाइनक्स में डायरेक्ट्री भी अपने आप में एक फाईल होती है | जिसमे दूसरी फाइल्स  तथा सब डायरेक्टरी रखी जाती है जब भी हम डायरेक्ट्री बनाते है तो लाइनक्स उससे सम्बंधित डायरेक्ट्री फाईल बनाता है |


Special device file :-(विशेष फाइल)

अधिकांश  सिस्टम फाइलें स्पेशल फाइलें होती है ये फाइलें सिस्टम की  भौतिक संरचना को

प्रदर्शित करती है। अर्थात् इन फाइलों के अन्तर्गत विभिन्न भोैतिक यंत्रों जैसे प्रिंटर ,मॉनिटर  से संबंधित फाइलें होती है इन फाइलों का उपयोग आपरेटिंग सिस्टम को हाडवेयर से सम्बन्धित करने के लिए किया जाता है।

Feature of Linux

 1.Linux is portable

Linux को सी प्रोग्रामिंग लेंग्वेज में लिखा गया है जिसका किसी प्रकार के कम्प्यूटर हार्डवेयर से सम्बन्ध नहीं रखा गया यह किसी भी प्रकार के कम्प्यूटर पर चलाने में सक्षम है जैसे PCAT, MACINTOS


2.Linux is a multi user and multitasking O.S.

Linux  में दी गई मल्टी यूजर सुविधायें अन्य ऑपरेटिंग सिस्टमो की तुलना में अधिक शशक्त है ,लाइनेक्स में भी अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम के सामान ही अनेक यूजर अकाउंट तो रख सकते है, लेकिन साथ ही अनेक यूजर एक login करके अपने कार्य कर सकते है इसके अलावा यूजर अपना अलग-अलग डेस्क टॉप चुन सकते है । तथा स्वतंत्र रूप से अपनी अलग डायरेक्टरी पासवर्ड दिया जा सकता है अर्थात कोई भी प्रयोक्ता किसी अन्य प्रयोक्ता की डायरेक्ट्री में किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकता है


3.Network information service

विभिन्न प्रकार के कई कम्प्यूटर को आपस में जोड़कर उनका उपयोग करने के लिए एक जाल स्वरूप संरचना बनायी जाती है। जिसे नेटवर्किंग कहते है। लाइनेक्स विशेष रूप से नेटवर्किंग में कार्य करने के लिये विकसित किया गया है। लाइनेक्स के द्वारा हम पासवर्ड को शेयर कर सकते है तथा फाईलो को समूहों में बाटकर नेटवर्क पर उपयोग में ला सकते है।


4.Multitasking

लाइनेक्स में किसी प्रोग्राम को छोटे छोटे कार्यों में विभाजित कर दिया जाता है। कई कार्यों को एक साथ किसी तरह से करने की आपरेटिंग सिस्टम की क्षमता को ही मल्टीटास्किंग कहते है।


5.Virtual Memory

यदि हम किसी बड़े प्रोग्राम या एप्लीकेशन को संपादित करते है। तो हमें कुछ फिजिकल मेमोरी की आवश्यकता होती है जो कि हार्ड डिस्क में जमा कर दी जाती है और आवश्यकता पड़ने पर इसे उपयोग में लाया जा सकता है।


6.Linux is network  friendly

Linux  नेटवर्क फ्रेंडली ऑपरेटिंग सिस्टम है , लाइनक्स का उपयोग दिन प्रतिदिन लगातार बढ़ रहा है यहाँ तक की विभिन्न एप्लीकेशन  सॉफ्टवेयर जैसे एंटीवायरस आदि को भी समय पर इन्टरनेट के माध्यम से अपडेट करना आवश्यक होता जा रहा है ,तात्पर्य यह है की धीरे धीरे प्रत्येक कंप्यूटर यूजर को इन्टरनेट से जुड़े रहना आवश्यक हो गया है अतः यह स्वाभाविक ही है की इन्टरनेट की लोकप्रियता और विकास के बाद आने वाले सभी ऑपरेटिंग सिस्टम इन्टरनेट से सम्बंधित शक्तिशाली टूल से सुसज्जित होते है ।आज किसी भी नेटवर्क की संगतता उसे परखने की महत्वपूर्ण कसौटी बन चुकी है चूंकि लाइनेक्स का विकास अनेक प्रोग्रामरो ने आपस में मिलकर इन्टरनेट के माध्यम से ही किया अतः इसमें विशेष रूप से इन्टरनेट को अधिक प्राथमिकता दी गई है लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम अपने आप में सशक्त इन्टरनेट सेवा प्रदाता कार्य करने की क्षमता रखता है साथ ही यह किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम पर क्लाईंट या सर्वर के रूप में कार्य कर सकता है


7.Linux is open

Linux distribution के साथ इसके source code भी उपलब्ध होते है जिसे हम अपनी आवश्यकतानुसार परिवर्तन कर सकते है ,इस अर्थ में लाइनेक्स एक खुला सिस्टम है।

History of Linux

 Linux की लोकप्रियता को समझने के लिये हमे 30 वर्ष पहले जाना होगाा। जब कम्प्यूटर बड़े बड़े घरों में, स्टेडियमो में होता था तथा उस समय उसका आकार ही सबसे बड़ी समस्या होता था, तब यह सोचा गया कि प्रत्येक कम्प्यूटर में अलग अलग आॅपरेटिंग सिस्टम होना चाहिये। एक साॅफ्टवेयर किसी सिस्टम मे एक विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिये होता है तथा किसी सिस्टम के लिये बना साॅफ्टवेयर किसी दूसरे सिस्टम पर कार्य नही कर सकता है। इसका आशय यह है कि एक सिस्टम में सम्बन्धित कार्य को करने वाले साॅफ्टवेयर का दूसरे कार्य के साथ व्यवहार संभव नहीं होता है। यह कार्य यूजर तथा सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर दोनों के लिये ही कठिन होता है। उस समय कम्प्यूटर की कीमत बहुत अधिक होती थी तो यूजर को अपनी आवश्यकता को देखते हुये कम्प्यूटर को खरीदना चाहिये ,IT की कुल लागत असीमित होती थी सन् 1969 में Bell Labs लेब्रोटरी के वैज्ञानिकों ने साॅफ्टवेयर सम्बन्धित समस्या को हल करने के लिये कार्य करना शुरू कर दिया। उन्होंने एक नये आॅपरेटिंग सिस्टम का निर्माण किया जिसकी विषेषताए थी


सिंपल व सुन्दर

असेम्बली कोड के स्थान पर प्रोग्रामिंग लैग्वेज में लिखना।

कोड को रिसाईकिल करने की क्षमता।

Bell Labs लेब्रोटरी के वैज्ञानिकों ने अपने प्रोजेक्ट का नाम “UNIX” रखा। कोड रिसाईकिलिंग का फीचर काॅफी महत्वपूर्ण था और यह तब तक महत्वपूर्ण था जब तक कम्प्यटूर सिस्टम एक कोड को लिखे ,जो कि सिर्फ एक सिस्टम के लिये विकसित किया गया हो। दूसरी तरफ यूनिक्स को स्पेशल कोड के छोटे-छोटे हिस्सों की आवश्यकता होती है, जिसको हम सामान्य तौर पर कर्नल के नाम से जानते है यह कर्नल इस कोड का सिर्फ एक हिस्सा होता है जो कि एक विशेष सिस्टम के लिये स्वीकारा जाता है तथा यूनिक्स सिस्टम का बेस होता है। आॅपरेटिंग सिस्टम तथा अन्य सारे फंक्शन इस कर्नल के चारों तरफ निर्मित किये जाते है। तथा यह Higher programming language में लिखे जाते है इस तरह की लैग्वेंज का निर्माण यूनिक्स सिस्टम के निर्माण के लिये किया जाता है। इस तकनीक का उपयोग करके आॅपरेटिंग सिस्टम का निर्माण काफी सरल हो गया है जिस पर हम विभिन्न प्रकार के हार्डवेयरों को रन कर सकते है।


यूनिक्स यूजरों के साथ ऐसा व्यवहार करती है कि वह विभिन्न सिस्टमों के साथ उसे आसानी से प्रयोग में ला सकें। इसी प्रकार यूनिक्स के विकास का क्रम चलता रहा। इसी क्रम में  सारी चीजें सम्भव हो गयी। हार्डवेयर व साॅफ्टवेयर वेन्डर अपने प्रोडक्टों को सपोर्ट करने के लिये यूनिक्स की मदद लेने लगे।


पहले समय में यूनिक्स सिर्फ बड़े बड़े वातावरण जहाॅ मेनफे्रम तथा मिनी कम्प्यूटर लगे होते थे उनमें पाया जाता था ।अगर हम सरकारी  या किसी फाइनेंशियल  कारपोरेशन  का कार्य किसी यूनिवर्सिटी में कर रहे है तो आप अपना कार्य यूनिक्स सिस्टम के माध्यम से कर सकते थे परन्तु छोटे कम्प्यूटर विकसित किये जाने लगे थे और 80 के दशक में अधिकतर लोगो के पास अपने होम कंप्यूटर  थे ,उस समय पी सी आर्किटेक्चर के लिये यूनिक्स के काफी सारे वर्जन उपजब्ध थे लेकिन उनमें से कोई भी पूर्ण रूप से स्वतन्त्र नहीं था


Linux B. Torvalds ने 1991 में पहले लाइनेक्स कर्नल को लिखाा था। लाइनेक्स ने काफी प्रसिद्वि प्राप्त की क्योंकि सोर्स कोड शीघ्रता से प्राप्त हो जाता है यूजर्स अपनी आवश्याकतानुसार कर्नल को स्वतन्त्र रूप से परिवर्तित कर सकते है। फिर भी यह समझना महत्वपूर्ण है कि लाइनेक्स कर्नल कैसे शामिल  किया जाता है और ये नये सिस्टम प्रोग्राम्स को लिखने से पहले कैसे कार्य करते है। लाइनेक्स कर्नल सोर्स कोड पर आधारित काॅनक्रीट आर्किटैक्चर एक विश्ववसनीय और up-to-date referrer Linux kernel hackers and developers को प्रदान कर सकते है। लाइनेक्स 1991 से कई बार प्रतिनिधियों के एक ग्रुप द्वारा दोहरायी जा चुकी है जो इंटरनेट पर Usenet Newsgroups के माध्यम से कम्यूनिकेट करते है।

What is Linux

 Linux एक ऑपरेटिंग सिस्टम  है। आपरेटिंग सिस्टम एक तरह का कम्प्यूटर का कण्ट्रोल  प्रोग्राम है जो कम्प्यूटर के समस्त क्रियाकलापो अर्थात कार्याें पर नियंत्रण रखता है Linux अन्य आपरेटिंग सिस्टम जैसे M.S. Dos, P.C. Dos, तथा Win -95 /98 आपरेटिंग की तरह ही एक सॉफ्टवेयर होता है।


Linux एक 32. multi operating System है, जो Intel 80386 पर्सनल कम्न्यूटर पर उपयोग करने के लिए डिजाइन किया गया। लाइनक्स के विकास की शुरूआत 1960 के दशक में हुई।


सन् 1968 में AT & T बेल प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं ने संयुक्त प्रयत्न से एक आॅपरेटिंग बनाया जिसे MULTICS ( Multiplexed Information Computer System कहा गया, इसके बाद 1969 में UNIX का विकास किया गया।


Linux का विकास UNIX से ही हुआ है। लाइनक्स का विकास टोरवैल्ड ने किया | सन् 1991 में इसका पहला वर्जन 0.11 रिलीज किया गया। Linux का  Graphical interface, X window System पर आधारित है |

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